नीतीश कुमार की पार्टी JDU की मांग, समय पर हो बिहार विधानसभा चुनाव

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बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति दिन प्रतिदिन बेकाबू होते जा रही है। ऊपर से राज्य बाढ़ से भी बुरी तरह प्रभावित हो गया है। इन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के विपक्षी दल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के पक्ष में नहीं हैं। दूसरी तरफ सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) समय पर चुनाव कारने की मांग कर रहा है। बिहार सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने शनिवार को कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव समय पर होने चाहिए ताकि नई सरकार विकास का काम कर सके।

जेडीयू प्रवक्ता व सांसद ने कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि चुनाव समय पर हों। हम चुनाव पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि नई सरकार विकास के लिए काम करे। राजीव रंजन ने कहा कि बिहार सरकार पर कोरोना संक्रमण और बाढ़ को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना क्रमित मरीजों के लिए अस्पतालों में 5000 बेड बनाए गए हैं। साथ ही राज्य में प्रतिदिन 20 हजार लोगों के सैंपल की जांच का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

बिहार में अक्टूबर-नवंबर के महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए विपक्षी दल, खासकर राजद ऐसी परिस्थिति में चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है। तेजस्वी यादव लगातार सार्वजनिक तौर पर वर्तमान स्थिति में चुनाव कराने के खिलाफ बयान दे चुके हैं। वहीं एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान भी इस हालात में चुनाव के पक्ष में नहीं हैं।

अभी हाल ही में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव बाढ़ प्रभावित मधुबनी के दौरे पर गए थे। यहां पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे लाशों की ढेर पर बिहार में विधानसभा चुनाव नहीं होने देंगे। तेजस्वी ने कहा था, ‘बिहार की स्थिति भयावह और नाजुक है। गांव के गांव बाढ़ से त्रस्त हैं। हम चुनाव आयोग से निवेदन करते हैं कि वो इसपर विचार करे। तेजस्वी ने कहा कि लोग मर रहे हैं। ऐसे में वो वोट करने कैसे जा पाएंगे।’

तेजस्वी ने कहा था, ‘हमारी पहली प्राथमिकता है जान बचाना, क्योंकि जान है तो जहान है। लोकतंत्र में लोक नहीं रहेगा तो तंत्र का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। आप चाहते हो कि लोग वोट करने आएं और सीधे श्मशान घाट जाएं। लाशों की ढेर पर हम चुनाव नहीं होने देंगे। बाढ़ के कारण जो फिलहाल हालात हैं, उसमें सोशल डिस्टेंसिंग तो छोड़ दीजिए, लोगों को जान बचाने में मुश्किल आ रही है।’

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